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कर्ण पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा ततः पार्थं विसृज्य च महावलः |  ४०   क
न्यहनत्पाण्डवीं सेनां वज्रहस्त इवासुरीम् |  ४०   ख
ततः प्राय़ाद्द्रुतं राजन्व्रीडन्निव जनेश्वरः ||  ४०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति