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शल्य पर्व
अध्याय ३
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सञ्जय़ उवाच
वैचित्रवीर्यवचनात्कृपाशीलो युधिष्ठिरः |  ४६   क
विनिय़ुञ्जीत राज्ये त्वां गोविन्दवचनेन च ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति