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सभा पर्व
अध्याय ३
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वैशम्पाय़न उवाच
काननानि सुगन्धीनि पुष्करिण्यश्च सर्वशः |  ३२   क
हंसकारण्डवय़ुताश्चक्रवाकोपशोभिताः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति