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शल्य पर्व
अध्याय ३५
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वैशम्पाय़न उवाच
त्रितो यज्ञेषु कुशलस्त्रितो वेदेषु निष्ठितः |  २२   क
अन्यास्त्रितो वहुतरा गावः समुपलप्स्यते ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति