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विराट पर्व
अध्याय ३
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युधिष्ठिर उवाच
किं त्वं नकुल कुर्वाणस्तत्र तात चरिष्यसि |  १   क
सुकुमारश्च शूरश्च दर्शनीय़ः सुखोचितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति