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शल्य पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र चाप्सरसः शुभ्रा नित्यकालमतन्द्रिताः |  ४   क
क्रीडाभिर्विमलाभिश्च क्रीडन्ति विमलाननाः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति