वन पर्व  अध्याय ७३

वृहदश्व उवाच

पुनर्गच्छ प्रमत्तस्य वाहुकस्योपसंस्कृतम् |  २०   क
महानसाच्छृतं मांसं समादाय़ैहि भामिनि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति