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शल्य पर्व
अध्याय ३
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सञ्जय़ उवाच
वाणगोचरसम्प्राप्तं प्रेक्ष्य चैव जय़द्रथम् |  ३१   क
सम्वन्धिनस्ते भ्रातॄंश्च सहाय़ान्मातुलांस्तथा ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति