menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ३
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
सर्वान्विक्रम्य मिषतो लोकांश्चाक्रम्य मूर्धनि |  ३२   क
जय़द्रथो हतो राजन्किं नु शेषमुपास्महे ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति