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शल्य पर्व
अध्याय ३
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सञ्जय़ उवाच
सात्यकेश्चैव यो वेगो भीमसेनस्य चोभय़ोः |  ३६   क
दारय़ेत गिरीन्सर्वाञ्शोषय़ेत च सागरान् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति