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शल्य पर्व
अध्याय ३
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सञ्जय़ उवाच
नातिक्रमिष्यते कृष्णो वचनं कौरवस्य ह |  ४८   क
धृतराष्ट्रस्य मन्येऽहं नापि कृष्णस्य पाण्डवः ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति