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वन पर्व
अध्याय १९८
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व्याध उवाच
व्यभिचारान्नरेन्द्राणां धर्मः सङ्कीर्यते महान् |  ३४   क
अधर्मो वर्धते चापि सङ्कीर्यन्ते तथा प्रजाः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति