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शान्ति पर्व
अध्याय ३०
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वासुदेव उवाच
वानरं चैव कन्या त्वां विवाहात्प्रभृति प्रभो |  २४   क
सन्द्रक्ष्यन्ति नराश्चान्ये स्वरूपेण विनाकृतम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति