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शान्ति पर्व
अध्याय ३०
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वासुदेव उवाच
ततः कदाचिद्भगवान्पर्वतोऽनुससार ह |  ३३   क
वनं विरहितं किञ्चित्तत्रापश्यत्स नारदम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति