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शान्ति पर्व
अध्याय ३०
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वासुदेव उवाच
त्वय़ाहं प्रथमं शप्तो वानरस्त्वं भविष्यसि |  ३६   क
इत्युक्तेन मय़ा पश्चाच्छप्तस्त्वमपि मत्सरात् |  ३६   ख
अद्यप्रभृति वै वासं स्वर्गे नावाप्स्यसीति ह ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति