menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ८०
chevron_left
chevron_right
पुलस्त्य उवाच
धर्मारण्यं हि तत्पुण्यमाद्यं च भरतर्षभ |  ६५   क
यत्र प्रविष्टमात्रो वै पापेभ्यो विप्रमुच्यते ||  ६५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति