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अनुशासन पर्व
अध्याय ३०
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शक्र उवाच
व्राह्मणः सर्वभूतानां मतङ्ग पर उच्यते |  ६   क
व्राह्मणः कुरुते तद्धि यथा यद्यच्च वाञ्छति ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति