आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ३०

पितर ऊचुः

स सागरान्तां धनुषा विनिर्जित्य महीमिमाम् |  ३   क
कृत्वा सुदुष्करं कर्म मनः सूक्ष्मे समादधे ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति