आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३०

वैशम्पाय़न उवाच

स चापि राजवचनादाचार्यो गौतमः कृपः |  ६   क
सेनामादाय़ सेनानी प्रय़यावाश्रमं प्रति ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति