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सभा पर्व
अध्याय ३०
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वैशम्पाय़न उवाच
द्रोणाय़ धृतराष्ट्राय़ विदुराय़ कृपाय़ च |  ५४   क
भ्रातॄणां चैव सर्वेषां येऽनुरक्ता युधिष्ठिरे ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति