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वन पर्व
अध्याय ३०
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युधिष्ठिर उवाच
यस्तु क्रोधं समुत्पन्नं प्रज्ञय़ा प्रतिवाधते |  १७   क
तेजस्विनं तं विद्वांसो मन्यन्ते तत्त्वदर्शिनः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति