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विराट पर्व
अध्याय ३०
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वैशम्पाय़न उवाच
दृढमाय़सगर्भं तु श्वेतं वर्म शताक्षिमत् |  १४   क
विराटस्य सुतो ज्येष्ठो वीरः शङ्खोऽभ्यहारय़त् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति