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विराट पर्व
अध्याय ३०
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वैशम्पाय़न उवाच
ततस्त्रय़ोदशस्यान्ते तस्य वर्षस्य भारत |  ३   क
सुशर्मणा गृहीतं तु गोधनं तरसा वहु ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति