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विराट पर्व
अध्याय ३०
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वैशम्पाय़न उवाच
शूरैः परिवृतं योधैः कुण्डलाङ्गदधारिभिः |  ५   क
सद्भिश्च मन्त्रिभिः सार्धं पाण्डवैश्च नरर्षभैः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति