अनुशासन पर्व  अध्याय १५१

भीष्म उवाच

कौशिकी यमुना सीता तथा चर्मण्वती नदी |  २२   क
नदी भीमरथी चैव वाहुदा च महानदी |  २२   ख
महेन्द्रवाणी त्रिदिवा नीलिका च सरस्वती ||  २२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति