आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७

व्यास उवाच

ततो मरुत्तमुन्मत्तो वाचा निर्भर्त्सय़न्निव |  ७   क
रूक्षय़ा व्राह्मणो राजन्पुनः पुनरथाव्रवीत् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति