menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
आक्रम्याक्रम्य साधूनां दारांश्चैव धनानि च |  ३४   क
भोक्ष्यन्ते निरनुक्रोशा रुदतामपि भारत ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति