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कर्ण पर्व
अध्याय ४६
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युधिष्ठिर उवाच
कच्चित्समागम्य धनुःप्रमुक्तै; स्त्वत्प्रेषितैर्लोहितार्थैर्विहङ्गैः |  ३६   क
शेतेऽद्य पापः स विभिन्नगात्रः; कच्चिद्भग्नो धार्तराष्ट्रस्य वाहुः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति