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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
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व्रह्मो उवाच
निमेषमात्रमपि चेत्संय़म्यात्मानमात्मनि |  ३   क
गच्छत्यात्मप्रसादेन विदुषां प्राप्तिमव्ययाम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति