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कर्ण पर्व
अध्याय ३०
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सञ्जय़ उवाच
आ मत्स्येभ्यः कुरुपाञ्चालदेश्या; आ नैमिषाच्चेदय़ो ये विशिष्टाः |  ६२   क
धर्मं पुराणमुपजीवन्ति सन्तो; मद्रानृते पञ्चनदांश्च जिह्मान् ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति