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शल्य पर्व
अध्याय ३०
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श्रीवासुदेव उवाच
क्रिय़ाभ्युपाय़ैर्निहतो मय़ा राजन्पुरातने |  ११   क
तारकश्च महादैत्यो विप्रचित्तिश्च वीर्यवान् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति