शल्य पर्व  अध्याय ३०

दुर्योधन उवाच

न प्राणहेतोर्न भय़ान्न विषादाद्विशां पते |  ३७   क
इदमम्भः प्रविष्टोऽस्मि श्रमात्त्विदमनुष्ठितम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति