शल्य पर्व  अध्याय ३०

दुर्योधन उवाच

गच्छ त्वं भुङ्क्ष्व राजेन्द्र पृथिवीं निहतेश्वराम् |  ५०   क
हतय़ोधां नष्टरत्नां क्षीणवप्रां यथासुखम् ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति