शल्य पर्व  अध्याय ३०

युधिष्ठिर उवाच

स कथं पृथिवीमेतां प्रददासि विशां पते |  ६०   क
सूच्यग्रं नात्यजः पूर्वं स कथं त्यजसि क्षितिम् ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति