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शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
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याज्ञवल्क्य उवाच
दानेन चानुग्रहणमस्पृहार्थे परार्थता |  २०   क
सर्वभूतदय़ा चैव सत्त्वस्यैते गुणाः स्मृताः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति