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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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याज्ञवल्क्य उवाच
शिष्याणामखिलं कृत्स्नमनुज्ञातं ससङ्ग्रहम् |  २४   क
सर्वे च शिष्याः शुचय़ो गताः परमहर्षिताः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति