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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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याज्ञवल्क्य उवाच
शाखाः पञ्चदशेमास्तु विद्या भास्करदर्शिताः |  २५   क
प्रतिष्ठाप्य यथाकामं वेद्यं तदनुचिन्तय़म् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति