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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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याज्ञवल्क्य उवाच
विश्वाविश्वेति यदिदं गन्धर्वेन्द्रानुपृच्छसि |  ३६   क
विश्वाव्यक्तं परं विद्याद्भूतभव्यभय़ङ्करम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति