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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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याज्ञवल्क्य उवाच
त्रिगुणं गुणकर्तृत्वादविश्वो निष्कलस्तथा |  ३७   क
अश्वस्तथैव मिथुनमेवमेवानुदृश्यते ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति