menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
chevron_left
chevron_right
याज्ञवल्क्य उवाच
वरं वृणीष्व विप्रर्षे यदिष्टं ते सुदुर्लभम् |  ४   क
तत्ते दास्यामि प्रीतात्मा मत्प्रसादो हि दुर्लभः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति