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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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याज्ञवल्क्य उवाच
विद्योपेतं धनं कृत्वा कर्मणा नित्यकर्मणि |  ४६   क
एकान्तदर्शना वेदाः सर्वे विश्वावसो स्मृताः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति