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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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विश्वावसुरु उवाच
कश्यपस्य पितुश्चैव पूर्वमेव मय़ा श्रुतम् |  ६०   क
तदनन्तरं च रुद्रस्य विश्वरूपस्य धीमतः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति