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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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विश्वावसुरु उवाच
व्रह्मलोकगताश्चैव कथय़न्ति महर्षय़ः |  ६४   क
पतिश्च तपतां शश्वदादित्यस्तव भाषते ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति