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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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कश्यप उवाच
नैषामुक्षा वर्धते जातु गेहे; नाधीय़ते सप्रजा नो यजन्ते |  १०   क
अपध्वस्ता दस्युभूता भवन्ति; ये व्राह्मणाः क्षत्रिय़ान्सन्त्यजन्ति ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति