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शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
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भीष्म उवाच
गोकोटिं स्पर्शय़ामास हिरण्यस्य तथैव च |  ९३   क
रत्नाञ्जलिमथैकं च व्राह्मणेभ्यो ददौ तदा ||  ९३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति