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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
विन्दुन्यासादय़ोऽवस्थाः शुक्रशोणितसम्भवाः |  ११६   क
यासामेव निपातेन कललं नाम जाय़ते ||  ११६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति