शान्ति पर्व  अध्याय ३०८

भीष्म उवाच

सम्पूर्णे नवमे मासे जन्तोर्जातस्य मैथिल |  ११८   क
जाय़ते नामरूपत्वं स्त्री पुमान्वेति लिङ्गतः ||  ११८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति