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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
तदमुक्तस्य ते मोक्षे योऽभिमानो भवेन्नृप |  १३१   क
सुहृद्भिः स निवार्यस्ते विचित्तस्येव भेषजैः ||  १३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति