आदि पर्व  अध्याय १९६

द्रोण उवाच

ततस्ते पार्थिवश्रेष्ठ पूज्यमानाः सदा त्वय़ा |  ११   क
प्रकृतीनामनुमते पदे स्थास्यन्ति पैतृके ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति