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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
स्वप्तुकामो न लभते स्वप्तुं कार्यार्थिभिर्जनैः |  १४१   क
शय़ने चाप्यनुज्ञातः सुप्त उत्थाप्यतेऽवशः ||  १४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति